सासाराम रोहतास, (नीरज कुमार)।
रोहतास जिला के सासाराम शहर में कचहरी पेट्रोल पंप के पीछे स्थित “मोहन साह तालाब” एक सौ वर्षों से भी अधिक पुराना ऐतिहासिक एवं सार्वजनिक तालाब है। इस तालाब के संबंध में वर्ष 1954 में संबंधित परिवार के सदस्यों के बीच बंटवारे को लेकर न्यायालय में विवाद हुआ था । उक्त वाद Title Suit No. 106 of 1954 में न्यायालय द्वारा पारित डिग्री में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि यह तालाब, उसके समीप स्थित मंदिर तथा उससे संबंधित रास्ता सदैव सार्वजनिक उपयोग के लिए रहेगा। अर्थात, तालाब के आसपास रहने वाले एवं उस क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए इसका सार्वजनिक स्वरूप सुरक्षित रहेगा।
इसके बाद संबंधित परिवार ने अपने हिस्से की आसपास की भूमि विभिन्न व्यक्तियों को बेची। उस समय खरीदारों को यही बताया गया कि तालाब, मंदिर एवं उससे संबंधित खुला क्षेत्र न्यायालय की डिग्री के अनुसार हमेशा सार्वजनिक रहेगा। इसी आधार पर अनेक लोगों ने वर्षों पहले वहां भूमि खरीदी और अपने घर बनाए। आज वही परिवार के कुछ उत्तराधिकारी उस सार्वजनिक तालाब पर निजी स्वामित्व का दावा कर उसे बेचने एवं समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं, जो स्थानीय निवासियों के अनुसार न्यायालय की डिग्री एवं दशकों से चली आ रही सार्वजनिक व्यवस्था के विपरीत है।
विवाद का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि जिस स्थान का मूल स्वरूप सदैव तालाब रहा है, उसे नगर निगम के अभिलेखों में भूमि के रूप में दर्शाकर कुछ दस्तावेज तैयार कराए गए। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह दस्तावेज वास्तविक स्थिति की जांच किए बिना बनाए गए, क्योंकि संबंधित स्थान आज भी एक जीवित तालाब है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह तालाब पिछले सौ वर्षों से अधिक समय में कभी नहीं सूखा और आज भी अपने मूल स्वरूप में विद्यमान है।
जब वर्ष 2021 में स्थानीय निवासियों को नगर निगम द्वारा तैयार किए गए इन दस्तावेजों की जानकारी मिली, तब उन्होंने इनके विरुद्ध न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना था कि सार्वजनिक तालाब को भूमि के रूप में दर्शाकर तैयार किए गए दस्तावेज तथ्यात्मक एवं कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण हैं। यह मामला वर्तमान में न्यायालय Title Suit No. 932/2021 में लंबित है ।
इसके पश्चात वर्ष 2024 में संबंधित पक्ष द्वारा पुनः इस सार्वजनिक तालाब को मिट्टी भरकर किसी अन्य व्यक्ति को बेचने का प्रयास किया गया। जब स्थानीय निवासियों ने इसका विरोध किया, तब उनके अनुसार तालाब पर कब्जा करने आए लोगों ने विरोध कर रहे नागरिकों को डराने-धमकाने के उद्देश्य से गोलीबारी की। इस घटना के संबंध में भी न्यायालय में Title Suit No. 1007/2024 एक अलग वाद दायर किया गया, जो वर्तमान में विचाराधीन है।
इस प्रकार वर्तमान में इस विषय से संबंधित दो वाद न्यायालय में लंबित हैं, जबकि वर्ष 1954 की न्यायालयीय डिग्री पहले से प्रभावी है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि उक्त तालाब, मंदिर एवं संबंधित मार्ग सार्वजनिक रहेंगे।
द्वितीय भाग : वर्तमान घटनाक्रम (03 जुलाई 2026 से)
दिनांक 03 जुलाई 2026 को संबंधित पक्ष, जिनके विरुद्ध स्थानीय निवासियों द्वारा न्यायालय में वाद दायर किया गया है तथा जिन पर सार्वजनिक तालाब पर कब्जा करने एवं विवादित दस्तावेज तैयार कराने के आरोप हैं, द्वारा मोहन साह तालाब में पुनः मिट्टी भराई का कार्य प्रारंभ किया गया।
इसकी सूचना स्थानीय निवासियों ने तत्काल नगर थाना, पुलिस उपाधीक्षक (DSP), पुलिस अधीक्षक (SP), जिला पदाधिकारी (DM) तथा अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) सहित संबंधित अधिकारियों को दी और कार्य रोकने का अनुरोध किया। उन्हें प्रशासनिक स्तर पर यह बताया गया कि यह कार्य तत्कालीन SDM श्रीमती नेहा कुमारी की सहमति अथवा आदेश से किया जा रहा है।
जब स्थानीय लोगों ने सीधे SDM से हस्तक्षेप का अनुरोध किया, तो उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि इस संबंध में कोई स्थगन आदेश (Stay Order) नहीं है, इसलिए प्रशासन कार्य नहीं रोकेगा। स्थानीय लोगों के अनुसार, यही रुख लिखित संदेशों के माध्यम से भी व्यक्त किया गया।
03 जुलाई से 07 जुलाई 2026 के बीच स्थानीय निवासियों ने DM, SP, DSP, SDM तथा अन्य अधिकारियों को कई आवेदन देकर तालाब की सुरक्षा एवं मिट्टी भराई रोकने की मांग की। इस अवधि में उन्होंने केवल वैधानिक एवं शांतिपूर्ण माध्यमों का ही सहारा लिया।
इस दौरान मिट्टी भराई का कार्य पुलिस की उपस्थिति में लगातार जारी रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित पक्ष के साथ हथियारबंद एवं आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी मौजूद थे, जिससे क्षेत्र में भय का वातावरण बना रहा। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने किसी प्रकार का विरोध या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाला कदम नहीं उठाया।
दिनांक 05 जुलाई 2026 को SDM श्रीमती नेहा कुमारी द्वारा एक आदेश जारी किया गया, जिस पर स्थानीय निवासियों ने निम्न आपत्तियां उठाई—
पहली आपत्ति: आदेश में दोनों पक्षों को सुनने का उल्लेख किया गया, जबकि स्थानीय निवासियों को न तो नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर मिला। उनके अनुसार यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
दूसरी आपत्ति: आदेश में भूमि को सरकारी नहीं बताया गया, जबकि स्थानीय निवासियों का दावा केवल इतना है कि वर्ष 1954 की न्यायालयीय डिग्री के अनुसार तालाब, मंदिर एवं मार्ग सार्वजनिक हैं। आसपास के भू-अभिलेखों एवं सीमाविवरण में भी तालाब का उल्लेख है, जिससे इसके सार्वजनिक स्वरूप की पुष्टि होती है।
तीसरी आपत्ति: आदेश में नगर निगम के दस्तावेजों को आधार बनाया गया, जबकि उनकी वैधता वर्ष 2021 से न्यायालय में चुनौती के अधीन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना वास्तविक स्थिति की जांच किए इन दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेना उचित नहीं था।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस आदेश से एक पक्ष को लाभ मिला और न्यायालय में वाद लंबित रहने के बावजूद मिट्टी भराई जारी रखने का अवसर प्राप्त हुआ।
03 जुलाई से 07 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन रात्रि में मिट्टी भराई जारी रही, जबकि स्थानीय लोग लगातार प्रशासन से कार्रवाई की मांग करते रहे।
दिनांक 07 जुलाई 2026 को समाजसेवी एवं स्थानीय निवासी श्री शंकर कुशवाहा, जो इस मामले को प्रशासन के समक्ष उठा रहे थे, को प्रशासन द्वारा बुलाया गया और लगभग आठ घंटे तक थाना एवं SDM कार्यालय में बैठाकर रखा गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस दौरान उन पर संबंधित पक्ष से समझौता करने का दबाव बनाया गया । जब उन्होंने इनकार किया, तो उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई, मुकदमे दर्ज करने एवं आर्थिक दंड की चेतावनी दी गई।
उसी दिन रात्रि लगभग 8 बजे उन्हें छोड़ा गया और उनके विरुद्ध ₹5,00,000 का बंधपत्र भरने का आदेश पारित किया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई उन्हें मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक रूप से प्रताड़ित करने के उद्देश्य से की गई।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक ओर तालाब में मिट्टी भराई प्रशासन की जानकारी में जारी रही, जबकि दूसरी ओर इस मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने वाले नागरिकों पर दबाव बनाया गया। उनके अनुसार, जिन लोगों पर अवैध कब्जे के आरोप हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय शिकायत करने वालों को ही प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
मांगें :
उपरोक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विनम्रतापूर्वक निम्नलिखित कार्रवाई किए जाने की प्रार्थना की जाती है—
- मोहन साह तालाब में किसी भी प्रकार की मिट्टी भराई, निर्माण, बिक्री, हस्तांतरण अथवा यथास्थिति में परिवर्तन पर तत्काल रोक लगाई जाए, जब तक कि सक्षम न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय न हो जाए।
- दिनांक 05 जुलाई 2026 को पारित SDM के आदेश की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यदि वह विधि एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत पाया जाए तो उसे निरस्त/स्थगित करने हेतु विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
- Title Suit No. 106 of 1954 की डिक्री, Title Suit No. 932/2021 तथा Title Suit No. 1007/2024 में लंबित न्यायिक कार्यवाहियों को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारियों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया जाए।
- मोहन साह तालाब के मूल स्वरूप, उसकी ऐतिहासिक स्थिति, राजस्व अभिलेखों, न्यायालयीय अभिलेखों तथा नगर निगम द्वारा तैयार किए गए दस्तावेजों की किसी स्वतंत्र एवं सक्षम एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- यदि जांच में किसी अधिकारी अथवा अन्य व्यक्ति द्वारा तथ्य छिपाकर, गलत अभिलेख तैयार कराकर अथवा कानून के विपरीत कार्रवाई किए जाने की पुष्टि होती है, तो उनके विरुद्ध विधि के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।
- स्थानीय निवासियों एवं इस विषय को शांतिपूर्ण एवं वैधानिक तरीके से उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को किसी भी प्रकार के अनावश्यक उत्पीड़न, दबाव या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया जाए।
- श्री शंकर कुशवाहा के साथ दिनांक 07 जुलाई 2026 को हुई कथित प्रशासनिक कार्रवाई, उन पर समझौते के लिए दबाव बनाने, धमकी देने तथा ₹5,00,000 के बंधपत्र संबंधी आदेश की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि कोई अनियमितता पाई जाए तो विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
- इस मामले में किसी भी पक्ष को न्यायालय में लंबित विवाद का लाभ उठाकर सार्वजनिक तालाब के स्वरूप में परिवर्तन करने अथवा तृतीय पक्ष के अधिकार उत्पन्न करने से रोका जाए।
- मोहन साह तालाब, मंदिर एवं सार्वजनिक मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक प्रशासनिक एवं पुलिस संरक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसी प्रकार का अतिक्रमण, क्षति अथवा कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो।
- न्यायालय के अंतिम निर्णय तक संबंधित सभी पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश जारी किया जाए तथा किसी भी प्रकार की अपरिवर्तनीय (Irreversible) कार्रवाई न होने दी जाए।



