औरंगाबाद, बिहार।
बिहार के औरंगाबाद जिले में बिजली विभाग की लापरवाही इस कदर व्याप्त है कि आए दिन झूलते हुए तारों की चपेट में आने से किसी न किसी की मौत होते रहती है। ताजा मामला मुफस्सिल थाना क्षेत्र के छोटकी बेला गांव की है जहां खेत में गए एक बुजुर्ग किसान की बिजली के टूट कर गिरे तार की चपेट में आने से मौत हो गई। मृतक की पहचान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के छोटकी बेला गांव के इंद्रदेव यादव के रूप में कई गई है। रात में हुई मूसलाधार बारिश के बाद में खेतों में पानी रोकने के उद्देश्य से मेढ़ बांधने गए थे।
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जिले के सदर प्रखंड के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के छोटकी बेला गांव में रविवार की सुबह सुबह ही बिजली के टूटे हुए तार की चपेट में आने से एक 68 वर्षीय किसान की मौत हो गयी।
मृत किसान की पहचान उसी गांव के इंद्रदेव यादव के रूप में की गई है। बताया जाता है कि शनिवार की रात्रि हुए मूसलाधार बारिश के बाद रविवार की सुबह सुबह किसान अपने धान के खेत में पानी रोकने के उद्देश्य से मेढ़ को दुरुस्त करने गए हुए थे। जहां पहले से ही जर्जर हुए बिजली का तार टूट कर गिरा हुआ था। किसान इंद्रदेव यादव बिजली के टूटे हुए तार को देख नहीं पाए और उससे उलझ कर उनकी मौत हो गई। परिजनों ने बिजली विभाग के संवेदक व कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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किसान को बिजली के टूटे हुए तार में उलझता देख आसपास के खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर शोर करते हुए उनके पास पहुंचे। किसी तरह बिजली के तार से छुड़ाकर उनको सदर अस्पताल औरंगाबाद पहुंचाया गया। जहां डॉक्टरों ने देखते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बुजुर्ग किसान के मौत की खबर सुनते ही परिजन चीत्कार उठे। इस घटना के बाद सदर अस्पताल पहुंचे राजद के जिला प्रवक्ता डॉ रमेश यादव ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए घटना पर दुख जताया है। उन्होंने विभाग से किसान के परिजनों को तत्काल उचित मुआवजा देने की मांग की है। डॉ रमेश यादव ने बताया कि परिजन गरीब किसान हैं और बिजली विभाग की गलती के कारण जिले में अब तक हजार से अधिक लोगों की टूटे हुए तारों में उलझ कर असमय मृत्यु हो चुकी है ।
नगर थाना प्रभारी सतीश बिहारी शरण ने बताया कि घटना की सूचना पर नगर थाना की पुलिस सदर अस्पताल पहुंची थी। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई और शव परिजनों को सौंप दिया है।



