Wednesday, April 15, 2026

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औरंगाबाद(राजेश रंजन)। जिला में संचालित सभी निजी प्रारंभिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के लिए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्राप्त शिकायतों के आलोक में यह निर्णय लिया गया है, ताकि अभिभावकों के आर्थिक हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा को विभिन्न माध्यमों से यह गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि कुछ विद्यालयों द्वारा नियमों के विरुद्ध पुनः नामांकन शुल्क (Re-admission), वार्षिक शुल्क एवं अन्य अनुचित शुल्कों की वसूली की जा रही है। साथ ही अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से ऊँचे दामों पर पाठ्य-पुस्तकें एवं यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से आर्थिक शोषण की श्रेणी में आता है।

उक्त परिप्रेक्ष्य में विधि-सम्मत प्रावधानों के तहत जिला प्रशासन, औरंगाबाद द्वारा यह निर्देश दिया गया है कि बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2019 एवं नियमावली, 2020 के प्रावधानों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। सभी निजी विद्यालयों को कक्षावार पुस्तकों की सूची, यूनिफॉर्म की विशिष्टताएँ एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों की जानकारी अपनी वेबसाइट एवं सूचना पट्ट पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करनी होगी, ताकि अभिभावक सुविधानुसार किसी भी स्थान से सामग्री क्रय कर सकें और उन्हें किसी विशेष दुकान या संस्था से खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए।

जिला प्रशासन द्वारा यह भी निर्देशित किया गया है कि सभी विद्यालय एक सप्ताह के भीतर अपनी वेबसाइट, सूचना पट्ट एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पुस्तकों की सूची, यूनिफॉर्म का विवरण तथा पूर्ण शुल्क संरचना का स्पष्ट प्रदर्शन सुनिश्चित करें। अधिनियम की धारा 4(2) एवं 4(3) के अनुसार बिना शुल्क विनियमन समिति की अनुमति के किसी भी प्रकार के शुल्क में 7 प्रतिशत से अधिक वृद्धि नहीं की जा सकती है।

दण्डात्मक प्रावधानों के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि प्रथम उल्लंघन की स्थिति में संबंधित विद्यालय पर अधिकतम एक लाख रुपये तक का अर्थदण्ड लगाया जाएगा, जबकि पुनरावृत्ति होने पर यह राशि दो लाख रुपये तक हो सकती है। लगातार उल्लंघन की स्थिति में विद्यालय की मान्यता समाप्त करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ की जाएगी।
इसके अतिरिक्त बिहार राज्य बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली, 2011 तथा RTE अधिनियम, 2009 के प्रावधानों का अनुपालन भी अनिवार्य किया गया है। विद्यालयों का संचालन लाभ के उद्देश्य से नहीं किया जाएगा तथा यूनिफॉर्म में कम से कम तीन वर्षों तक कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। RTE Act के तहत कमजोर वर्ग एवं वंचित समूह के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटों पर नामांकन सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
साथ ही सभी विद्यालयों को अपनी कुल नामांकन क्षमता एवं आरक्षित सीटों का विवरण विभागीय पोर्टल पर अद्यतन करना होगा। नामांकन या प्रोन्नति के समय कैपिटेशन फीस या पुनः नामांकन के नाम पर किसी भी प्रकार का शुल्क लेना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

जिला पदाधिकारी ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें तथा संबंधित प्रतिवेदन जिला शिक्षा पदाधिकारी, औरंगाबाद को उपलब्ध कराएं।

जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा निरंतर अनुश्रवण किया जाएगा और की गई कार्रवाई से जिला पदाधिकारी को अवगत कराया जाएगा।
जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अभिभावकों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता, मनमानी शुल्क वसूली या आर्थिक शोषण को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आदेश की अवहेलना करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

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