औरंगाबाद, बिहार।
जिले के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पहाड़ी इलाका होने के कारण गांव से 12 किलोमीटर दूर बूथ बनाया गया। इस बूथ पर मतदान की अंतिम समय तक मात्र 4 वोटरों ने मतदान किया है।
जिले में लोकतंत्र का महापर्व लोकसभा चुनाव को लेकर पूर्ण तैयारियों के बावजूद वोटिंग पर कहीं कहीं असर पड़ रहा है। यातायात के साधन के अभाव में जिले के मदनपुर प्रखंड में लंगुराही पहाड़ के दुर्गम जंगली इलाके के ढकपहरी गांव के मात्र 4 वोटर ही वोट डाल पाए हैं। इस गांव में कुल 38 मतदाता हैं और इनका बूथ इनके गांव से करीब 12 किलोमीटर दूर राजकीय मध्य विद्यालय छालीदोहर- सड़ियार में स्थित है।ज्ञात हो कि ढकपहरी गांव समेत इस बूथ पर पांच गांवों का मतदान केंद्र बनाया गया है।
जिसका बूथ नंबर 367 है।
मदनपुर प्रखण्ड के इस अति नक्सल प्रभावित इस इलाके में सीआरपीएफ का कैंप है और कैंप तक जाने के लिए सड़क भी नक्सल ऑपरेशन को संचालित करने के उदेश्य को पूरा करने के लिए ही बनी है।
इस रास्ते में पड़ने वाले लंगुराही, पचरुखिया, ढ़कपहरी एवं अन्य गांवों के लोग इसी रास्ते का आवागमन के लिए इस्तेमाल करते है। इस इलाके के लोगो के लिए पैदल ही सफर करना नियति है। क्योंकि सड़क होने के बावजूद यातायात के साधन मौजूद नहीं है। यहां तक कि गरीबी की वजह से ऑटो भी यहाँ के लोग नहीं चला पाते हैं।
- जीटी रोड पर क्रॉसिंग बंद करने से पटना कैनाल का रास्ता हुआ बंद, एक किलोमीटर बारुण जाने के लिए लगाना पड़ रहा है 6 किलोमीटर का चक्कर
- दाउदनगर के केसराड़ी में चर्चित कुंदन यादव हत्याकांड का खुलासा, SIT की कार्रवाई में दो गिरफ्तार, रेकी में प्रयुक्त बाइक बरामद
- 16 मई से गायब 4 वर्षीय बच्चे को पुलिस ने किया बरामद, गया की महिला ने बहला फुसला कर किया था अपहरण, आईजी का खुलासा
- नबीनगर में एनटीपीसी स्टेज-II निर्माण कार्य तेज, 2029 से नई इकाइयों से होगा बिजली उत्पादन, देश में बिजली उत्पादन में दूसरे स्थान पर होगा नबीनगर
- स्वामी प्रपन्नाचार्य के सानिध्य में धुरिया में भागवत सप्ताह यज्ञ जारी, 17 अप्रैल को होगा पूर्णाहुति
इसी वजह से इस रास्ते का इस्तेमाल करते हुए गांव के 38 में से सिर्फ 4 मतदाता 12 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर बूथ पर आए और लोकतंत्र के मतदान के महापर्व में अपनी भूमिका का निर्वहन किया।
ग्रामीण रामजतन सिंह भोक्ता ने बताया कि 12 किलोमीटर की दूर से वे पैदल आकर मतदान कर रहे हैं । उनके गांव से मात्र चार लोग ही आ पाए हैं।


