औरंगाबाद (राजेश रंजन) जहानाबाद की रहने वाली नीट की छात्रा की विवादास्पद मौत के खुलासे के बाद नए नए खुलासे हो रहे हैं। इससे मिलता जुलता एक और मामला सामने आया है। जो औरंगाबाद जिले की गोह की रहने वाली छात्रा के साथ घटित हुई थी। जिसकी संदिग्ध मौत पटना एग्जीबिशन रोड स्थित परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल में हुई थी। औरंगाबाद जिले के गोह की रहने वाली 15 वर्षीया नीट की छात्रा अनामिका गुप्ता की भी मौत संदिग्ध परिस्थिति में हो चुकी है। छात्रा एग्जीबिशन रोड स्थित परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी। जिसकी मौत की सूचना 6 जनवरी को आई थी। छात्र के पिता धर्मेंद्र गुप्ता ने बताया कि उन्हें जिस समय उनकी बच्ची की मौत की सूचना दी गई थी। वह पटना में ही उपस्थित थे। फिर भी उनके आने का इंतजार नहीं किया गया और उनकी बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया। उन्हें अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं मिला है। उनकी बेटी के केस में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि जिस बच्ची के कमरे में उसके पिता को जाने की इजाजत नहीं थी उस कमरे में 2 मुस्लिम लड़के कैसे पहुंचे जो कथित तौर पर फांसी पर लटक रही अनामिका गुप्ता के शव को नीचे उतारा। उस पंखे का ब्लेड जरा भी टेढ़ा नहीं हुआ जबकि उनकी बेटी का वजन 45 किलोग्राम थी। यह भी विश्वास करने वाली बात नहीं है कि पंखे के ब्लेड में कोई फांसी लगा सकता है। उनकी बेटी की हत्या की गई थी और मामले को रफा दफा करने के लिए जल्दी जल्दी में शव को हटवा दिया गया था।
अनामिका के पिता धर्मेन्द्र गुप्ता ने बताया कि उनकी लड़की पढ़ने में काफ़ी होशियार थी और वह डॉक्टर बनना चाहती थी। इसी कारण उसे नीट की तैयारी के लिए पटना भेजे थे। 19 जनवरी को उसकी तेरहवीं थी।
शम्भू हॉस्टल के मामले को हाई लाईट होने पर अनामिका के पिता ने पटना गाँधी मैदान थाने में मामला दर्ज कराया है। मामले में उन्होंने 2 मुस्लिम लड़कों समेत हॉस्टल संचालक और सहेली को नामजद अभियुक्त बनाया है।
अनामिका के पिता धर्मेंद्र गुप्ता का कहना है कि उनकी लड़की लव जिहाद की शिकार हुई है। आखिर दोनों मुस्लिम लड़के जो की एक बंगाल का मुकर्रम रेजा था और दूसरा पूर्णिया का मुजाहिद रेजा था उसके कमरे में कैसे पहुंचे थे। जिस कमरे में उसके पिता की जाने की इजाजत नहीं थी उसे कमरे में अनजान लड़के कैसे पहुंच गए। पुलिस मामले की तह तक जांच करे तो कई बड़े रैकेट का पर्दाफाश पास हो सकता है।
अनामिका के पिता ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी का पटना के हॉस्टल में पिछले साल 23 जून को एडमिशन कराया था। बेटी ने ही कहा था कि मैं पढ़ना चाहती हूं। हर अभिभावक चाहता है कि बेटा-बेटी पढ़-लिखकर नाम रौशन करे।
30 दिसंबर को बच्ची घर आई थी। 4 जनवरी को दोपहर ढाई बजे उन्होंने उसे हॉस्टल में छोड़ा था। उससे उनकी 6 जनवरी सुबह साढ़े 9 बजे बात हुई थी। कोई टेंशन में नहीं थी। वो बहुत साहसी थी। सीसीटीवी से पता चलता है कि साढ़े 12 बजे हॉस्टल वालों को पता चलता है कि अनामिका की मौत हो गई।
उनलोगों ने उन्हें 1 बजे फोन किया। वे उस वक्त पटना में ही था। पौने 2 बजे जब वे हॉस्टल पहुंचे उससे पहले ही बेटी की लाश को हॉस्टल से हटा दिया गया था। कहा गया कि उसे पीएमसीएच भेजा है।
अनामिका की मां सीमा देवी ने बताया कि उनकी बच्ची पढ़ने में काफी होशियार थी। जिस दिन की यह घटना है उस दिन भी उनसे बात हुई थी और उसने कहा कि वह घर से बाहर जा रही है और अंडा खाकर वापस आएगी। उसके बाद उसकी मौत की खबर आई। हॉस्टल संचालक और उसकी और रूम में रहने वाले रूममेट से अगर पूछताछ की जाए तो वह सब खुलासा हो सकता है।



