राजेश रंजन।
औरंगाबाद, बिहार।
औरंगाबाद जिले में पुलिस प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे स्पीडी ट्रायल अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण फैसले में न्यायालय ने आरोपी को दो वर्ष के सश्रम कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। यह फैसला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) न्यायालय औरंगाबाद ने सुनाया।
यह मामला 19 मार्च 2024 का है, जब अवर थाना क्षेत्र के बलिया पंचायत स्थित बेलवा गांव में रहने वाले शैलेंद्र मेहता के घर में घुसकर दो व्यक्तियों ने मारपीट की थी और उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। घटना के बाद पीड़ित की लिखित शिकायत पर अवर थाना में कांड संख्या 57/24 के तहत केस दर्ज किया गया था।
घटना की गंभीरता को देखते हुए औरंगाबाद पुलिस की टीम ने आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन की मदद से जांच को आगे बढ़ाया। पुलिस ने आरोपियों की पहचान सुनिश्चित की और फिर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा।
मामले की सुनवाई आज पूरी हुई, जहां अभियोजन पक्ष की ओर से जिला अभियोजन पदाधिकारी विवेक कुमार सिन्हा ने सभी तथ्यों और प्रमाणों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और उसे कानून के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए।
सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने आरोपी को आर्म्स एक्ट की धारा 25 (1-बी) और धारा 27 के तहत दोषी पाते हुए प्रत्येक में अलग-अलग दो वर्ष का सश्रम कारावास और 2500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर आरोपी को अतिरिक्त छह माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने आदेश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
औरंगाबाद पुलिस ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे न्याय व्यवस्था में आम नागरिकों के विश्वास को मजबूत करने वाला बताया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि तेजी से सुनवाई और दंड मिलने से समाज में अपराध के खिलाफ संदेश जाएगा और पीड़ितों को न्याय मिल सकेगा।


