औरंगाबाद, बिहार।
औरंगाबाद के महिला एवं बाल विकास विभाग हाईकोर्ट के आदेश को भी धता बता रहा है। साल 2017 में आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के चयन का बड़े पैमाने पर विज्ञापन आया था। विज्ञापन संख्या 02/2017 के आधार पर खाली पदों पर बिहार भर में नियुक्ति हुई थी। लेकिन औरंगाबाद जिले के बारुण और मदनपुर प्रखण्ड में चयन होने के बाद भी बहाली नहीं की गई। इस प्रक्रिया में देर होने से अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का रुख किया। जहां से साल 2018 में ही उनके पक्ष में फैसला आया लेकिन महिला एवं बाल विकास ने हाईकोर्ट के आदेश को भी नहीं माना।
हालांकि इसी फैसले के आलोक में पटना जिले के पालीगंज प्रखण्ड में आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका की बहाली कर दी गई।
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अभ्यर्थियों वंदना कुमारी, पुष्पा कुमारी, फूलकुमारी, उर्मिला कुमारी, खुशबु कुमारी, ममता कुमारी, सोनी कुमारी, रजनी कुमारी आदि ने बताया कि पटना हाई कोर्ट का आदेश केस संख्या CWJC1201/2018 में आया था। जो रिंकू देवी बनाम बिहार सरकार था।
अभ्यर्थियों ने बताया कि चयन होने के बावजूद उनकी यह बहाली सीडीपीओ और जिला महिला एवं बाल विकास पदाधिकारी ने जानबूझ कर रोक कर रखा है।
इस सम्बन्ध वे डीएम श्रीकांत शास्त्री को शिकायत की हैं।



